Sunday, April 11, 2010

अम्मा जी आज बहुते दुखी बा.


हे भगवान ई का हो रहा है? हमरे तो नसीबे खराब हैं...अब ई उम्र में ये लडकवा बचुआ लडते झगडते हैं. किसका दोष दें? अऊर किसको नाही दोष दें?

पर एक बात पक्की है कि ई सारा खेल अनूप खेलता है. इस नालायक को सिर्फ़ एक यही काम है कि इधर उधर दिन भर फ़ोन बाजी करके सबको आपस में लडवाया करता है.

कल हम इसका ब्लाग पर कमेंट किया रहा....इस नालायक ने सब हटा दिये......अब आप ई नाही पूछोगे क्या कि अम्माजी आप उस दुष्ट का ब्लाग पर क्या अचार खाने गई थी?

अरे बचुआ...हमसे ना...ऊ अन्याय नाही देखा जाता. कल उंहा पर बबली बिटिया के लिये ज्योत्सना ने कमेंट किया था और ऊ इस नालायक ने छाप रखा था....अब हम ऊंहा पूछे कि ई ज्योत्सना तुहार कौन लगती है? या तुम खुदे ज्योत्सना बनके लोगों का इज्जत खराब किया करते हो? तो इस ने हमारे कमेम्ट तो मिटा दिये....पर ज्योत्सना का नाही मिटाया. अऊर बडका शरीफ़ बनके बिल मा घुसा रहता है. मोडरेशन लगा के रखता है.....बोलो सार्वजनिक मंच पर कैसा मोडरेशन? ऊ चच्चा टिप्पणी सिंह इसका बारे मे बिल्कुले सही भविष्य वानी किये रहे....इसकी चिठ्ठा चर्चा अब खत्म हुई समझो....

ई ब्लागजगत मा जो कछु होरहा है ऊ सब इसी का किया धरा है? अब हम बुढौती मे इसके कहां तक पीछे २ घूमे? पर का करें? इसका इलाज तो अम्माजी मरते मरते भी कर जायेगी.... अम्माजी के पास ई दुष्ट की कई सारी टेलीफ़ोन काल रिकार्ड पडी है अऊर हम अब बस आखिरी तंग होके उनका पोडकास्ट लगा देंगी. तब ही इसकी अक्ल ठीकाने आयेगी.

बिटवा अनूप...ई आखिर चेतावनी बा...सुधर जा...वर्ना बहुते पछतायेगा...तू अऊर तेरे दो चार चेले और चेलियों की तो अम्माजी अच्छी तरह बैंड बजा कर रहेगी.... फ़िर मत कहना कि अम्माजी ने चेताया नही था. कल तूने मेरे कमेंट डिलिट किये....कोई बात नही....फ़िर ऊंहा दूसरों के भी डिलिट कर....आखिर कब तक मोडरेशन लगा के बैठेगा?

अरे बचुआ लोग...जरा हमार इस अनूप की बुद्धि ठीक करने के लिये भगवान जी से प्रार्थना करना....जिससे ये इन कुलच्छनियों के जाल से बाहर आ सके अऊर इसके चेले चपाटे के कहने मे आकर ये लौंडपने की हरकते बंद करे.

हे भगवान ...तूने ये क्या किया? अरे हम डाकटर से पूछा था कि ई अभी तक बचपना काहे करत है? तो डाक्टर बोला कि अम्माजी कुछ कुछ बच्चा लोग ६० साल की उम्र होने तक भी टीन एज मे ही रहता है....हे परमात्मा अब समझ आया कि ये क्यों लौंडों के साथ रहता है..और काहे लौंडे लपाडो जैसी हरकते करता है?

आज अम्म्जी बहुते दुखी है....डाक्टर अमर ने पूछा है कि अम्माजी तुम सास हो या बहू? तो डाक्टर सुन ले...अम्माजी पहले बहु थी...अभी सास बने हमे कोई ५० वर्ष हुई गये हैं...अब तुन्ही समझ ल्यो कि हम क्या हैं? अऊर हां डाक्टर अमर...हमारे इस टिन एज लौंडे का इलाज तुम नाही कर सकत क्या?



6 comments:

  1. Vah ---bahut shandar ---lekh.ammaji,blog jagat men apka svagat hai.

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  2. अच्छी प्रस्तुति। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

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  3. charn sprsh karti hun Ammaji
    aap ka ye blog bhi pichele blog ki tarah Anup ji ko hi samrpit ho kar reh gaya.........
    waise agli baar kiska number hai
    aur Ammaji mujh nadan ko apna ashirwad dijiyega ..........

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  4. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  5. अमर जी पूछत रहे कि आप सास हो कि बहू। का फरक पड़त है। सास हुईं तो कभी बहू रही ही होंगी। और बहू हुईं तो कभी न कभी सास जरूर बनेंगी। बहू की नहीं तो दामाद की। अम्‍मां जी आपके ब्‍लाग का नाम सास बहू है। मेरी अम्‍मां तो हैं पर सासू अम्‍मां नहीं हैं। सो मैं आपको सासू अम्‍मां मान लेता हूं। पांव लागूं। हां जी हम तो अपनी सासू अम्‍मां के पांव छूते रहें हैं।

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  6. आप के दुख मे हम सहभागी है ।

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